यदा राजा तदा प्रजा - ये तो राज्पाल के दिनों कि कहना है - आज प्रजास्वाम्य कि दिनों मे "यदा प्रजा तदा राजा कि बात है
लेकिन आज कल नेताओं मेहि नहीं आम जनता मे भी स्वार्थ बढ गई है ..देश कि उन्नती भूल कर यांत्रिक जीवित मे डूब गई हैं
लेकिन अप्ने तक्लिफे सहन करके देश के बारे मे -देश के उन्नती के बारे मे सोचने वाले भी हमारे बीच मे है. इन मे से एक देश भक्त और योधा आंद्र प्रदेश के ,चित्तूर वासि मुरुगेशन .
कई लोग किसी एक काम पर कुछ रोज सोचेंगे कुछ महीनें कोशिश करते हैं काम नहीं होता तो उसे छोड देते हैं
आर्तर काटन ( अंग्रेजि इंजेनेर) ,के.एल.ऱाव ( पूर्व केंद्र मंत्रि) आदी से प्रस्तुत किया गया नदियो के अनुसंधान के बारे मे मुरुगेशन लग भग 27 साल लड रहा है.
1986 मे मुरुगेशन केवल एक विद्यार्थो ही था . उस समय वे भी अपने साथी विद्यार्थियो के तरह घूम्ता रहे थे
पर, उनमे एक विचार बार बार फिरते थे कि युव शक्ती को एक महोन्नत काम नहीं सौंपा गया तो उनके साथ साथ देश भी भ्रश्ठ हो सकता है
एक दिन किसी एक किताब के द्वरा नदियों के अनुसंधान के बारे मी कुछ समाचार मुरुगेशन को पहुंचा. मुरुगेशन को समझ मे आया कि नदियां के अनुसंधान ही युवजनों के लिये समुचित कार्यक्रम हैं
लेकिन इसे कर्वाने के लिये एक मज्बूत सर्कार कि आवश्यकता है इस लिए उन्होने अप्ने प्रणाळिका मे और एक अंश को जोडा. देश के प्रधान मंत्रि के पद के लिए प्रत्यक्ष रूप मे चुनाव होना चाहिये.. प्रधान मंत्रि एम.पियो से नहीं हर एक मत दान वाले से चुनाना चाहिए
इससे प्रधान मंत्रि को पूर्णाधिकार मिलेगा . वे एम.पियो के संतुष्ठ के लिये नही आम आद्मी के संतुष्ठ के लिये पालन कर सक्ते
प्रधान मंत्रिके चुनाव ऐसा होने पर ही वे प्रत्येक सेना बन सकते हैं नदियों के अनुसंधान कर सक्ते हैं लेकिन केवल नदियो के अनुसंधान के लिये नाला बन्वाना मे कोई विशेशता नही है. अगर आप हमे उन नालावों को ट्रान्स्पोर्ट के लिए भी उपयोग कर सकेगा तो विशेश लाभ हो सक्ता है.
लेकिन अनुसंधान और ट्रान्स्पोर्ट के लिए नाला बन्वाने चाहे तो करोड करोड के हेग्डेर के भूमि डूब हो जाएगा
आज दिन एक रेल्वे ट्राक बन्वाने लिये भू सेकरण कर्ने मे भी कई साल गुजर जाती है देर हो जाती है इस सिल सिले मे नाला बन्वाना कैसा संभव ?
मुरुगेशन सोच्ना पडा कई दिन कई महीने .कई पुस्तक पढा. रष्या के सहकारी पद्दती के खेती बारी पर पढा. लेकिन समस्या डूब हो जाकर खो जाने वाले भूमियो के बारे मे है. रष्या मे सभी भूमि को सर्कार ले लिया था
इस पद्दति भारत मे नहीं चल सक्ता. इस लिये मुरुगेशन् ने एक नया प्रबंध की प्रस्तुत किया. देश भर के सभी किसानों को मिलाकर एक समैख्य बन्वाना. उसे प्रति गांव पर शाखा होगा. हर एक किसान उस मे सदस्या होगा. देश के सभी खेति बारी के जमीन उस समैख्य को लीज पर सौंपा जा सक्ता है मुरुगेशन सोचा की ऐसे कर्वाने से ही अच्चा होगा - नया समस्या पैदा नही हीता.
इसे मुरुगेशन अप्ने योजना मे चार वी अंश बना दिया.
इत्ना प्रयाश के बाद बी उन मे कुछ न कुछ शंका थि
इत्ने दिन गांव गांव मे -शगर शगर मे कोई न कोई श्रम के भिना गरीबों और किसानों कि कून पीकर आसान से लाख लाख रुप्ये कमा करके रहने वाले बडे लोग इस महत्व पूर्ण विकास रुक्वाने कि कोशिश करेगा. गरीबों और किसानों कि मन मे कई शंकावों कि बीज अवश्य डाल सक्ते है..
इन सवाल को कैसा साम्ना करना?
इसके लिये मुरुगेशन ने अपने योजना मे पांच वि अंश को जोडा.
आज कि करेन्सि को निषिद्द कर्के नया करेन्सि छिपाना . सभी लोग अप्ने पास होने वालि पुराना करेन्सि का 'ईमान" रुजु करने के बाद नया करेन्सि पाने कि प्रबंध कर्वाना.
लेकिन आज कल नेताओं मेहि नहीं आम जनता मे भी स्वार्थ बढ गई है ..देश कि उन्नती भूल कर यांत्रिक जीवित मे डूब गई हैं
लेकिन अप्ने तक्लिफे सहन करके देश के बारे मे -देश के उन्नती के बारे मे सोचने वाले भी हमारे बीच मे है. इन मे से एक देश भक्त और योधा आंद्र प्रदेश के ,चित्तूर वासि मुरुगेशन .
कई लोग किसी एक काम पर कुछ रोज सोचेंगे कुछ महीनें कोशिश करते हैं काम नहीं होता तो उसे छोड देते हैं
आर्तर काटन ( अंग्रेजि इंजेनेर) ,के.एल.ऱाव ( पूर्व केंद्र मंत्रि) आदी से प्रस्तुत किया गया नदियो के अनुसंधान के बारे मे मुरुगेशन लग भग 27 साल लड रहा है.
1986 मे मुरुगेशन केवल एक विद्यार्थो ही था . उस समय वे भी अपने साथी विद्यार्थियो के तरह घूम्ता रहे थे
पर, उनमे एक विचार बार बार फिरते थे कि युव शक्ती को एक महोन्नत काम नहीं सौंपा गया तो उनके साथ साथ देश भी भ्रश्ठ हो सकता है
एक दिन किसी एक किताब के द्वरा नदियों के अनुसंधान के बारे मी कुछ समाचार मुरुगेशन को पहुंचा. मुरुगेशन को समझ मे आया कि नदियां के अनुसंधान ही युवजनों के लिये समुचित कार्यक्रम हैं
लेकिन इसे कर्वाने के लिये एक मज्बूत सर्कार कि आवश्यकता है इस लिए उन्होने अप्ने प्रणाळिका मे और एक अंश को जोडा. देश के प्रधान मंत्रि के पद के लिए प्रत्यक्ष रूप मे चुनाव होना चाहिये.. प्रधान मंत्रि एम.पियो से नहीं हर एक मत दान वाले से चुनाना चाहिए
इससे प्रधान मंत्रि को पूर्णाधिकार मिलेगा . वे एम.पियो के संतुष्ठ के लिये नही आम आद्मी के संतुष्ठ के लिये पालन कर सक्ते
प्रधान मंत्रिके चुनाव ऐसा होने पर ही वे प्रत्येक सेना बन सकते हैं नदियों के अनुसंधान कर सक्ते हैं लेकिन केवल नदियो के अनुसंधान के लिये नाला बन्वाना मे कोई विशेशता नही है. अगर आप हमे उन नालावों को ट्रान्स्पोर्ट के लिए भी उपयोग कर सकेगा तो विशेश लाभ हो सक्ता है.
लेकिन अनुसंधान और ट्रान्स्पोर्ट के लिए नाला बन्वाने चाहे तो करोड करोड के हेग्डेर के भूमि डूब हो जाएगा
आज दिन एक रेल्वे ट्राक बन्वाने लिये भू सेकरण कर्ने मे भी कई साल गुजर जाती है देर हो जाती है इस सिल सिले मे नाला बन्वाना कैसा संभव ?
मुरुगेशन सोच्ना पडा कई दिन कई महीने .कई पुस्तक पढा. रष्या के सहकारी पद्दती के खेती बारी पर पढा. लेकिन समस्या डूब हो जाकर खो जाने वाले भूमियो के बारे मे है. रष्या मे सभी भूमि को सर्कार ले लिया था
इस पद्दति भारत मे नहीं चल सक्ता. इस लिये मुरुगेशन् ने एक नया प्रबंध की प्रस्तुत किया. देश भर के सभी किसानों को मिलाकर एक समैख्य बन्वाना. उसे प्रति गांव पर शाखा होगा. हर एक किसान उस मे सदस्या होगा. देश के सभी खेति बारी के जमीन उस समैख्य को लीज पर सौंपा जा सक्ता है मुरुगेशन सोचा की ऐसे कर्वाने से ही अच्चा होगा - नया समस्या पैदा नही हीता.
इसे मुरुगेशन अप्ने योजना मे चार वी अंश बना दिया.
इत्ना प्रयाश के बाद बी उन मे कुछ न कुछ शंका थि
इत्ने दिन गांव गांव मे -शगर शगर मे कोई न कोई श्रम के भिना गरीबों और किसानों कि कून पीकर आसान से लाख लाख रुप्ये कमा करके रहने वाले बडे लोग इस महत्व पूर्ण विकास रुक्वाने कि कोशिश करेगा. गरीबों और किसानों कि मन मे कई शंकावों कि बीज अवश्य डाल सक्ते है..
इन सवाल को कैसा साम्ना करना?
इसके लिये मुरुगेशन ने अपने योजना मे पांच वि अंश को जोडा.
आज कि करेन्सि को निषिद्द कर्के नया करेन्सि छिपाना . सभी लोग अप्ने पास होने वालि पुराना करेन्सि का 'ईमान" रुजु करने के बाद नया करेन्सि पाने कि प्रबंध कर्वाना.
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